P A R V A T

This series is dedicated to the might old Rajmahal Hills in my hometown; Sahibganj(Jharkhand). Parvat in English translates to the mountain.


A big thanks to Mukesh for participating in the series as my model.


T A P A S Y A (Penance)

नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम्॥


संयमरहित अयुक्त पुरुष को आत्म ज्ञान नहीं होता और अयुक्त को भावना और ध्यान की क्षमता नहीं होती।

भावना रहित पुरुष को शान्ति नहीं मिलती अशान्त पुरुष को सुख कहाँ ?


For the unsteady, there is no wisdom, and there is no meditation for the unsteady man.

And for an un-meditated man, there is no peace. How can there be happiness for one without peace?


-Bhagwat Gita


T Y A A G (Abandonment)

न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते।

न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति॥


कर्मों के न करने से मनुष्य नैर्ष्कम्य को प्राप्त नहीं होता और न कर्मों के संन्यास से ही वह पूर्णत्व प्राप्त करता है।


No man can attain freedom from activity by refraining from action; nor can he reach perfection by merely refusing to act.


-Bhagwat Gita


P A R I S H R A M (Hard work)

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥


आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते और न अग्नि इसे जला सकती है जल इसे गीला नहीं कर सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती।


Weapons do not cleave the soul, fire does not burn it, waters do not wet it, and the wind does not dry it.


-Bhagwat Gita


P R A T I G Y A (Promise)

विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।

निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति॥ २-७१


जो पुरुष सब कामनाओं को त्यागकर स्पृहारहित, ममभाव रहित और निरहंकार हुआ विचरण करता है, वह शान्ति प्राप्त करता है।


That man attains peace who, abandoning all desires, moves about without longing,

without the sense of mine and without egoism.


-Bhagwat Gita


P A R I W A R T A N (Transformation)

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर।

असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः॥


तुम अनासक्त होकर सदैव कर्तव्य कर्म का सम्यक आचरण करो क्योकि अनासक्त पुरुष कर्म करता हुआ परमात्मा को प्राप्त होता है।


Go on efficiently doing your duty at all times without attachment.

Doing work without attachment man attains the Supreme.


-Bhagwat Gita


P A R O P K A A R (Philanthropy)

प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।

अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते॥


सम्पूर्ण कर्म प्रकृति के गुणों द्वारा किये जाते हैं अहंकार से मोहित हुआ पुरुष मैं कर्ता हूँ ऐसा मान लेता है।


In fact, all actions are being performed by the modes of Prakruti (Primordial Nature).

The fool, whose mind is deluded by egoism, thinks: “I am the doer.”


-Bhagwat Gita

I publish my photos in a series of six photos. See them first on my Instagram handle @someonekrishna. Every photo should be viewed in sequence as they are part of a series. Caption/ description is a major part of the photos. In order to understand my photos and the series better, please do read the description. Subscribe to my blog and never miss an update even if you are not on Instagram or other social media platforms.



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